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उत्तराखंड के चौकड़ी गांव की महिलाओं का हुनर बना आत्मनिर्भरता की मिसाल: उर्वशी बाली

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उत्तराखंड के चौकड़ी गांव की महिलाओं का हुनर बना आत्मनिर्भरता की मिसाल: उर्वशी बाली

उत्तराखंड के चौकड़ी गांव की महिलाओं का हुनर बना आत्मनिर्भरता की मिसाल: उर्वशी बाली
उत्तराखंड के चौकड़ी गांव की महिलाओं का हुनर बना आत्मनिर्भरता की मिसाल: उर्वशी बाली

काशीपुर। उत्तराखंड की वादियों में इन दिनों घूम रहीं उर्वशी दत्त बाली को हमेशा से ही साधारण लोगों के बीच में बैठना, ओर उनकी जिंदगी को करीब से समझना पसंद रहा है। उनका मानना है कि यदि इंसान मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम है, तो उसे बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के लिए अच्छा जरूर करना चाहिए। इसी सोच के साथ जब उर्वशी दत्त बाली चौकड़ी गांव पहुंचीं, तो रास्ते में उन्हें गुलाबों से भरा एक खूबसूरत घर दिखाई दिया। गुलाब के फूल से शुरू हुई बातचीत ने उन्हें ऐसी कहानी तक पहुंचा दिया, जिसने गांव की कई महिलाओं की जिंदगी बदल दी।
दरअसल, कई साल पहले अमेरिका से आई कैथलीन नाम की महिला जब गांव घूमने पहुंचीं, तो उनकी नजर उन महिलाओं पर पड़ी जो बच्चों को स्कूल छोड़ने के साथ-साथ सीढ़ियों पर बैठकर बुनाई कर रही थीं। महिलाओं के हाथों का हुनर देखकर उन्होंने पूछा कृ“क्या आप मेरे लिए काम करेंगी?” यहीं से शुरू हुई इस गांव की, साधारण महिलाओं की कहानी, जो सिर्फ बच्चों को स्कूल छोड़ने जाती थी या बाहर बैठकर इंतजार करती थी। स्वेटर बुनते-बुनते, किसी की नजर क्या पड़ी और हुनर पहुंच गया अमेरिका तक। आज इस गांव की लगभग 63 महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। पिछले 14 वर्षों से यह गांव की महिलाओं के बनाए ऊनी उत्पादों को अमेरिका तक पहुंचा रही है। विदेशों से डिजाइन और रंगों के ऑर्डर आते हैं, जिनके अनुसार महिलाएं खूबसूरत बुनाई तैयार करती हैं। तैयार प्रोडक्ट्स पर टैग लगाकर उन्हें अमेरिका भेजा जाता है। उर्वशी दत्त बाली कहती हैं कृ“यह सिर्फ बुनाई नहीं, बल्कि सपनों को जोड़ने की कहानी है।