
जमशेदपुर । जमशेदपुर के बिष्टूपुर स्थित पार्वती घाट में मुखाग्नि से पहले एक शव का अंतिम संस्कार मृतक के बेटे ने रुकवा दिया। उसने अपने पिता की हत्या का आरोप अपनी सौतेली मां, बहन व भगिना पर लगाते हुए जांच की मांग की। इसके बाद शव को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक का नाम रामजी प्रसाद (65) था और वे गम्हरिया के भालोटिया रोड निवासी थे। उनकी मौत की खबर सुनकर बेटा अमरेश बिहार के जहानाबाद से जमशेदपुर पहुंचा और पार्वती श्मशान घाट में आकर हंगामा शुरू कर दिया। उसने आरोप लगाया कि संपत्ति अपने नाम लिखाकर उसकी सौतेली मां, बहन व भगिना ने उसके पिता को मार दिया है, क्योंकि उनके शरीर पर कई जगह में चोट के निशान हैं। पुलिस ने अपनी जांच में भी मृतक के शरीर पर चोट का निशान पाया। लिहाजा, शव को अपने कब्जे में कर लिया। वैसे, चिकित्सक ने रामजी प्रसाद की मृत्यु पर जो रिपोर्ट दी है, उसमें कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है। अमरेश ने पुलिस को बताया कि उसके पिता के साथ लगातार मारपीट की जा रही थी। उनकी बिहार के जहानाबाद में जमीन है, जिसे भी उन लोगों ने अपने नाम लिखवा लिया है। इसे लिखवाने के लिए उनके पिती की इतनी पिटायी की गयी कि उनकी मौत हो गयी। इस घटना के बाद पार्वती श्मशान घाट में काफी देर तक अफरातफरी मची रही। एक शव के चक्कर में अन्य शवों का पोस्टमार्टम रुका रहा। अमरेश ने बताया कि उसके बेटे को पुलिस ने रामजी प्रसाद के अपहरण के आरोप में जेल भेज दिया था। इसमें उसकी सौतेली मां का हाथ था। अपने दादा के अपहरण में जेल गया उसका बेटा निर्दोष था, फिर भी उसे जेल की हवा खानी पड़ी थी। उसने आरोप लगाया कि उसके पिता की पीट-पीटकर हत्या की गयी है और मौत का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया है इस मामले में पुलिस का कहना है कि रामजी प्रसाद ने दो विवाह किये थे। पहली पत्नी से अमरेश है, जबकि दूसरी पत्नी से बेटी रूबी है। बेटी कहना है कि कई दिनों से पिता बीमार थे और गिर भी गए थे। इसके चलते उनके शरीर में चोट का निशान है। उनकी स्वभाविक मौत हुई है और जो भी आरोप उनके सौतेले भाई द्वारा लगाया जा रहा है, वह गलत है। जब शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए ले जाया गया तो शव कोविड पॉजिटिव निकल गया। उसके बाद यहां अफरातफरी मच गयी। जिन लोगों ने शव को छुआ था, वे लोग इधर-उधर भागने लगे। जो लोग शव को लेकर आपस में भिड़ रहे थे, वे शव को छूने से कतराने लगे।

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