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हाथी दल के उत्पात ने एक ही रात में तीन गांव के 18 परिवार को किया बेघर

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कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल स्थित पसान वन परिक्षेत्र में 45 हाथियों के दल ने एक ही रात में तीन गांव के 18 घरों को तोड़ दिया। झुंड ने बरबस पारा के पहाड़ के निकट डेरा जमाया है। हाथियों के दल की वापसी ढाई माह बाद हुई है। वन विभाग निकटवर्ती गांव के लोगों को सुरक्षित जगह जाने की हिदायत दे रही है। खलिहानों में इन दिनों धान रखी हुई है। हाथियों के दल के आने से ग्रामीणों में भय क वातावरण बना हुआ है।
         पसान वन परिक्षेत्र में हाथियों का दल ऐसे समय में वापस आया है, जब किसानों के खलिहान में उनकी साल भर की कमाई धान की फसल रखी हुई है। जिन गांवों में हाथियों के

दल ने मकान तोड़ा है उनमें बरबस पारा के 13, बलबहरा के 3 और मोहनपुर बगबुडी के 2 मकान शामिल हैं। दल में शामिल हाथियों ने मकान के साथ यहां रखे धान चावल को भी चट कर दिया। आंगन में रखे मोटर साइकिल को भी नुकसान पहुंचाया है। हाथियों के दल के आने से आसपास के 20 गांव में मिंजाई का काम बंद हो चुका है। धान उपार्जन केंद्र लाने की तैयारी में पानी फिर गया है। इधर वन अमले कि माने तो दल दिन भर जंगल में रहते हैं और रात होते ही गांव की ओर आ जाते हैं। धान के अलावा किसानों की बाड़ियों में लगी सब्जियों को भी बर्बाद कर रहे हैं। प्रभावित गांवों के बीटगार्ड ईश्वर मानिकपुरी ने बताया कि कर्मचारियों के साथ हाथियों पर नजर रखे हैं और हर संभव मदद का भरोसा लोगों को दे रहे हैं।

कर्मचारियो का यह भी कहना है कि रात में जंगल से निकल कर हाथी किस गांव की ओर रूख करेंगे इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाती। इस वजह से आसपास के गांव के लोगों को कच्ची मकान छोड़कर स्कूल अथवा आंगनबाड़ी में जाने के लिए कहा जा रहा है। गांव के बाहर बने एकांत घरों को छोड़कर लोगों को घनी बस्तियों में रहने की सलाह दी जा रही है। सुरक्षा के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया गया है जो पर्याप्त नहीं है। जितनी तादाद में हाथी भ्रमण कर रहे है उस लिहाज से वन विभाग की ओर से लगाया गया अमला बहुत कम है। वन कर्मियों की मानें तो 45 हाथी अलग-अलग टुकड़ियों में भी बंट जाते हैं। इससे उन पर निगरानी करने में और भी अधिक मुश्किल होती हैं। दल में तीन हाथी के नन्हे बच्चे हैं। ऐसे में पूरा दल उनकी सुरक्षा के लिए और भी अधिक संवेदनशील है। लोगों की भीड़ देख कर वे और भी अधिक आक्रामक हो जाते है। प्रशिक्षित लोगों को निगरानी दल के साथ रखा जा रहा हैं।
      कटघोरा वन का पसान रेंज पिछले ढाई साल से हाथियों की समस्या से जूझ रहा। इस रेंज में जनवरी से अब तक हाथियों 320 आवासें को नुकसान पहुंचाया है। जिनमें 123 को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। कर्मचारियों नियुक्ति कम किए जाने नुकसान का प्रकरण समय पर नहीं बन रहा है। हालिया स्थिति यह है कि जो कर्मचारी रात भर हाथी की लोकेशन पर ध्यान रखते हैं वहीं सुबह प्रकरण तैयार कर हैं। दोहरा कार्यभार होने के कारण समय पर मुआवजा नहीं मिल रहा है।

8 thoughts on “हाथी दल के उत्पात ने एक ही रात में तीन गांव के 18 परिवार को किया बेघर

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