कानपुर। घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के रहमपुर गांव में स्कूल का होमवर्क मिलने पर दस साल के बच्चे ने अपहरण की ऐसी कहानी रची कि सच्चाई जानकर पुलिस भी हैरान रह गई। सुबह घर से निकला छात्र स्कूल नहीं पहुंचा और देर शाम घर लौटकर आया। स्कूल की छुट्टी के बाद उसके घर न लौटने से परिवार वाले परेशान हो गए और तलाश करते हुए पुलिस को भी सूचना दी। रहमपुर गांव में रहने वाले सदन लाल कुशवाहा ने बेटी रीता की शादी बिल्हौर के गांव के सरमन से की थी और उसे दस साल का बेटा लकी है। करीब तीन महीने से रीता बेटे को लेकर अपने मायके में रह रही है और बेटे का एडमिशन भी गांव के पास ही स्कूल में कराया है। सोमवार की सुबह रीता खेत पर चली गई। बेटी के जाने के बाद सदनलाल ने नाती लकी से स्कूल जाने के लिए कहा। इसपर लकी खेत के पास पड़ी चप्पल लेकर जाने की बात कहकर चला गया। स्कूल की छुट्टी का समय होने जाने पर जब वह नहीं लौटा तो सदनलाल चिंतित हो गए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर तलाश शुरू की। इस बीच शाम ढलने से पहले लकी घर लौट आया तो नाना ने राहत मिली। लकी ने नाना को खुद के अपहरण की बात बताई। उसने बताया कि रहमपुर रेलवे क्रासिंग के पास बाबा मिले थे, जिन्होंने उससे गांव जाने का रास्ता पूछा। इसके बाद बाबा ने एक रुमाल सूंघा दी और वह बेहोश हो गया। उसकी आंख खुली तो वह एक ईंट भ_े पर पड़ा हुआ था और हाथ और पैर बंधे थे। किसी तरह वह खुद को छुड़ाकर भाग आया। रोड पर आकर बाइक सवार को घटना की जानकारी दी तो उसने गांव के बाहर लाकर छोड़ दिया। उसकी बातें सुनकर गांव में दहशत फैल गई और पुलिस को सूचना दी गई। पतारा चौकी इंचार्ज विनीत मिश्रा ने पहुंचे और बच्चे से पूछताछ की। पुलिस को देखकर उसने सारा सच कबूल दिया। चौकी इंचार्ज ने बताया कि बच्चे ने स्कूल न जाने के डर से फर्जी कहानी बताई थी। बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था और टीचर की डांट से बचने के लिए वह स्कूल नहीं जाना चाहता था। इसलिए उसने अपहरण की कहानी बताई।

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Детальнее – анонимный вывод из запоя