०एक ही परिवार के सात लोग हुए गंभीर रूप से घायल
सोनभद्र । अनपरा थाना अन्तर्गत करहिया में एक तेज रफ्तार अल्टो कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई । कार के पलते ही कार में भीषण आग लग गई। घटना वाराणसी शक्तिनगर मार्ग के करहिया के पास की है। कार सवार 10 लोगों में से 6 बच्चे है जिसमें सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह सभी लोग ओबरा थाना क्षेत्र के बताया जा रहे हैं घायलों को पहले डीबुलगंज अस्पताल लाया गया जहां इनकी गंभीर हालत को देखते हुए इन्हें नेहरू रेफर कर दिया गया।जानकारी के मुताबिक मारुति अल्टो कार ओबरा से अनपरा की ओर आ रही थी । उसकी रफ्तार काफी तेज थी जिससे वो अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे पलट गई। इसके बाद कार में आग लग गई और वो धू-धू कर जलने लगी दुर्घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय अनपरा पुलिस मौके पर पहुँच गयी।
पुलिस ने दमकल को बुलवाया लेकिन दमकल की गाड़ी काफी देर तक नही पहुँच सकी। तब तक कार जल कर खाक हो चुकी थी। गलिमत रहा कि समय रहते सभी घायल कार से बाहर आ चुके थे वरना बड़ा हादसा हो सकता था। कार में आग लगने के बाद सड़क पर काफी भीड़ लग गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से सभी घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से डीबुलगंज अस्पताल में भेजा जहा अस्पताल के डॉक्टरों ने घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए नेहरू रेफर कर दिया है। बताया जा रहा है कि कार में ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी के परी विश्वकर्मा पुत्री उपेंद्र विश्वकर्मा उम्र 15 वर्ष, सुहाना विश्वकर्मा पुत्री सतीश विश्वकर्मा उम्र 10 वर्ष, जूही विश्वकर्मा पत्नी नीतीश विश्वकर्मा उम्र 25 वर्ष, आयर्न विश्वकर्मा पुत्र उपेंद्र विश्वकर्मा उम्र 8 वर्ष, यश विश्वकर्मा उम्र 3 वर्ष, युवराज विश्वकर्मा पुत्र सतीश विश्वकर्मा उम्र 4 वर्ष, प्रिंस विश्वकर्मा पुत्र उपेंद्र विश्वकर्मा उम्र 8 वर्ष, रूबी विश्वकर्मा पत्नी उपेंद्र विश्वकर्मा पुत्र उम्र 35 वर्ष, नीतीश विश्वकर्मा पुत्र जनार्दन विश्वकर्मा उम्र लगभग 26 वर्ष निवासीगण बिल्ली मारकुंडी ओबरा थाना के सवार थे यह सभी ओबरा की ओर से अनपरा जा रहे थे।

Вызвать врача-нарколога нужно при первых признаках тяжелой абстиненции, когда самостоятельно справиться уже невозможно. Если зависимый страдает от сильной тошноты, многократной рвоты, дрожи в конечностях, мучительной головной боли, резких скачков давления, одышки, боли в области сердца, панических атак или слуховых галлюцинаций, медлить нельзя. В таких случаях капельница становится не просто способом облегчить состояние, а жизненно необходимой мерой. Нарушение водно-электролитного баланса, общее обезвоживание и интоксикация внутренних органов могут привести к инсульту, инфаркту, острой печеночной или почечной недостаточности. Именно поэтому важно не ждать утра, а звонить сразу — помощь доступна круглосуточно, и бригада выезжает в любое время дня и ночи. Характер болей и расстройство самочувствия при запоях часто носят выраженный характер, поэтому поставить капельницу необходимо как можно быстрее.
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