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द्रोणासागर पर जंगल भूमि को धनुर्विद्या प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग

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द्रोणासागर पर जंगल भूमि को धनुर्विद्या प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग
-केडीएफ ने दिया जिला विकास प्राधिकरण को ज्ञापन

 

द्रोणासागर पर जंगल भूमि को धनुर्विद्या प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग
द्रोणासागर पर जंगल भूमि को धनुर्विद्या प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग

काशीपुर। काशीपुर डेवलपमेंट फोरम ;केडीएफद्ध की पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा द्रोणासागर में स्थित उपेक्षित एवं जंगल भूमि को धनुर्विद्या प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग को लेकर वृहस्पतिवार को जिला विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष जयकिशन को एक ज्ञापन सौंपा।
केडीएफ अध्यक्ष राजीव घई ने बताया कि द्रोणासागर क्षेत्र ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह महर्षि द्रोणाचार्य की धनुर्विद्या से जुड़ा हुआ माना जाता है। वर्तमान में इस क्षेत्र का एक बड़ा भाग उपेक्षा के कारण जंगलनुमा हो चुका है। संस्था द्वारा वर्तमान में लगभग 50 बच्चों को धनुर्विद्या का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, लेकिन मानक प्रशिक्षण के लिए आवश्यक 60 मीटर की दूरी उपलब्ध न होने के कारण बच्चों का समुचित एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण संभव नहीं हो पा रहा है। प्रस्तावित स्थल टाट वाले बाबा के आश्रम एवं डमरू वाले बाबा के मंदिर के मध्य स्थित रिक्त भूमि है, जो वर्तमान में निगरानी के अभाव में जंगलबानी रूप ले चुकी है। इस भूमि को धनुर्विद्या प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने से न केवल भूमि का सकारात्मक एवं सुरक्षित उपयोग होगा, बल्कि द्रोणासागर क्षेत्र की पौराणिक परंपरा को भी पुनः स्थापित किया जा सकेगा। इस दौरान चक्रेश जैन, हेम चंद्र हर्बाेला, ऊषा रानी, विम्पी शर्मा, रेनू चौहान, पूजा अरोरा आदि मौजूद रहे।