
काशीपुर। समाजसेवी एवं डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली ने कहा है कि आज के डिजिटल युग में बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उनका स्पष्ट मानना है कि तकनीक से बच्चों को पूरी तरह काटना संभव नहीं है क्योंकि यह आज के दौर की जरूरत है, लेकिन इसे पारिवारिक अनुशासन से संतुलित करना अनिवार्य है।
पिछले 22 वर्षों से एक कामकाजी महिला के रूप में सक्रिय, श्रीमती बाली ने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि कोविड काल में आॅनलाइन क्लास के दौरान ही उन्होंने अपनी बेटी को पहली बार मोबाइल दिया था, और कहा था कि हमने जिंदगी में जो बनना था बन गए हैं। हमारे मोबाइल टाइम से आपका कोई मतलब नहीं है, लेकिन आपका यह टाइम सिर्फ पढ़ाई और खेल का है, आपको सिर्फ यही दो चीज 18 साल तक बहुत अच्छे से अनुशासन में रहकर करनी है, और तभी से घर के शेड्यूल अनुसार, गेम या फ्रेंड्स से बात के लिए, रात 9 से 10 बजे का समय तय कर दिया गया था। आज वो 16 वर्ष की होने वाली है, और आज भी वही नियम जारी है। रात को 10 बजते ही वह खुद फोन रख देती है। उर्वशी बाली का कहना है कि हर, परिवार के सोने और उठने की दिनचर्या अलग होती है, इसलिए माता-पिता को अपने ही अनुरूप, बच्चों का दिन का कोई भी ‘एक घंटा’ मोबाइल के लिए तय करना चाहिए। आज बच्चों को गेम खेलने और दोस्तों से बातचीत करने की जरूरत होती है, इसलिए जब उन्हें पता होगा कि यह उनका तय समय है, तो वे दिनभर मोबाइल के लिए जिद नहीं करेंगे और न ही परिवार में कलह होगी, कि सारा दिन फोन बच्चों के हाथ में रहता है। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में भी इस चीज को लागू करना चाहिए कि बच्चों को इस चीज के लिए बोले, और जितना इस चीज समझाएंगे तो सभी बच्चों की समझ में आएगा कि मोबाइल का एक घंटा ही सबके लिए सीमित है।
