
नई दिल्ली। साहित्य अकादमी और पद्मश्री पुरस्कारों से सम्मानित दया प्रकाश सिन्हा की पुस्तक में चक्रवर्ती सम्राट अशोक की तुलना क्रूर शासक औरंगजेब से किये जाने को लेकर मंगलवार को जदयू की तीखी प्रतिक्रया के बाद पूर्व उप मुख्यमंत्री व पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी और राज्य सरकार के मंत्री सम्राट चौधरी ने मोर्चा संभाला। दोनों नेताओं ने स्वीकारा की सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से नहीं की जा सकती है। यह निंदनीय है। याद रहे कि मंगलवार को जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह व पार्टी के राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने लेखक द्वारा इस आशय की तुलना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से दया प्रकाश सिन्हा के सभी पुरस्कार वापस लेने की मांग करते हुए जदयू ने चेतावनी दी थी कि वह इस तुलना को कदापि बर्दाश्त नहीं करेगा। बुधवार को फिर उपेंद्र कुशवाहा और ललन सिंह ने इसको लेकर बयान जारी कर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। साथ ही राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से सिन्हा को मिले पुरस्कार वापस लेने की मांग दोहराई। कुशवाहा ने कहा कि सम्राट अशोक बिहार व भारत के अमिट प्रतीक थे और हैं। उनके और बिहार के साथ कोई खिलवाड़ करे, यह बर्दाश्त नहीं। नीतीश सरकार द्वारा सम्राट अशोक के सम्मान में राजधानी में सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया गया है। उनकी जयंती पर राजकीय अवकाश घोषित है। ललन सिंह ने कहा कि प्रियदर्शी सम्राट अशोक मौर्य बृहत और अखंड भारत के निर्माता थे। उनके बारे में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल असहनीय है, अक्षम्य है। जिस व्यक्ति ने ऐसा किया है वह विकृत विचारधारा से प्रेरित है। भाजपा ने भी दया प्रकाश सिन्हा की बातों को निंदनीय बताया। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर कहा कि हम अहिंसा और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक सम्राट अशोक की कोई भी तुलना औरंगजेब जैसे क्रूर शासक से करने की कड़ी निंदा करते हैं। सम्राट अशोक पर जिस लेखक (दया प्रकाश सिन्हा) ने आपत्तिजनक टिप्पणी की, उनका आज न भाजपा से कोई संबंध है और न उनके बयान को बेवजह तूल देने की जरूरत है। भाजपा का राष्ट्रीय स्तर पर कोई सांस्कृतिक प्रकोष्ठ नहीं है। प्राचीन भारत के यशस्वी सम्राट अशोक का भाजपा सम्मान करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी की थी। पंचायती राज मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि लेखक दया प्रसाद सिन्हा द्वारा सम्राट अशोक के बारे में जो कुछ भी कहा गया है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह के बयान को हिन्दुस्तान में कभी भी सहा नहीं जा सकता है। मौर्यकाल का शासन हिन्दुस्तान का स्वर्णकाल रहा है। एक चक्रवर्ती सम्राट की तुलना मुगलकालीन सम्राट औरंगजेब से करना मनगढ़ंत, असत्य एवं काल्पनिक है। सम्राट अशोक के संबंध में किसी भी इतिहासकारों ने कभी ऐसी टिप्पणी नहीं की है। इस देश में जिस तरह गांधी की, चाणक्य की पूजा होती है, उसी तरह हमलोग सम्राट अशोक को पूजने का काम करते हैं। उधर, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डा. निखिल आनंद ने भी ट्वीट कर कहा कि साहित्य की आड़ में इतिहास की कब्र खोदना निंदनीय है।

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