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तिलक लगाने से होती है सनातन की पहचान: उर्वशी दत्त बाली

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तिलक लगाने से होती है सनातन की पहचान: उर्वशी दत्त बाली

तिलक लगाने से होती है सनातन की पहचान: उर्वशी दत्त बाली
तिलक लगाने से होती है सनातन की पहचान: उर्वशी दत्त बाली

काशीपुर। गोपीपुरा की पांडे काॅलोनी में हो रहे बाबा खाटू श्याम जी के पावन संकीर्तन महोत्सव में उस वक्त भक्ति और चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब गांव में खाटू श्याम जी के मंच से उर्वशी दत्त बाली ने बच्चों को संस्कारों और सनातन की पहचान को लेकर बताया।
उर्वशी दत्त बाली ने हर माँ, ओर बहन को घर के बच्चे के माथे पर नियमित रूप से तिलक लगाने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तिलक केवल एक धार्मिक परंपरा या सामान्य लकीर नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों के मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सनातन संस्कृति का मजबूत रक्षा-कवच है। ये तिलक केवल लकीर नहीं, सनातन की शान और पहचान है। कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों और श्र(ालुओं को सीधे और आत्मीय अंदाज में समझाते हुए उर्वशी बाली ने कहा कि जैसे वर्दी से सिपाही और डाॅक्टर की पहचान होती है  वैसे ही माथे पर लगे तिलक से सनातनी की पहचान होती है। जब हमारा बच्चा तिलक लगाकर स्कूल या समाज में जाता है, तो उसके भीतर  अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति गौरव पैदा होता है।