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जर्जर हो चुकी रोडवेज बस अड्डे की बिल्डिंग, यात्रियों को हो रही भारी परेशानी

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जर्जर हो चुकी रोडवेज बस अड्डे की बिल्डिंग, यात्रियों को हो रही भारी परेशानी

 

जर्जर हो चुकी रोडवेज बस अड्डे की बिल्डिंग, यात्रियों को हो रही भारी परेशानी
जर्जर हो चुकी रोडवेज बस अड्डे की बिल्डिंग, यात्रियों को हो रही भारी परेशानी

काशीपुर। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. एनडी तिवारी द्वारा लगभग साढ़े चार दशक पूर्व काशीपुर में शुरू किया गया रोडवेज बस अड्डा आज अपनी जर्जर हालत और उपेक्षा की वजह से यात्रियों के लिए परेशानी का केंद्र बन चुका है। कभी जहां से बड़े-बड़े शहरों के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध रहती थीं, वही परिसर आज वीरान व बदहाल दिखाई देता है।
विशाल प्रांगण के साथ नगर में केंद्रीय स्थान पर होने के बावजूद बस अड्डे की स्थिति चिंताजनक है। पूरे परिसर में टूटी-फूटी दीवारें, कूड़े के ढेर, गंदा पानी और रखरखाव की भारी कमी स्पष्ट दिखाई देती है। साफ-सफाई की कोई उचित व्यवस्था नहीं दिखती। रात में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होना आम बात है। पीने के पानी का नल भी जर्जर अवस्था में पड़ा मिला। कैंटीन की खिड़कियों की टूटी जालियाँ और आसपास बिखरे शराब के पाउच प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि बसों का वर्षों पुराना टाइम टेबल लगा है जो कि समय के साथ गलत साबित हो रहा है। यात्रियों को यह पता तक नहीं होता कि कौन सी बस कब चलेगी। रोडवेज स्टेशन के टाइमकीपर के अनुसार यहां से प्रतिदिन लगभग 45 बसें ;27 निगम और 18 अनुबंधितद्ध संचालित की जाती हैं, जिनमें दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, आगरा, हरिद्वार, देहरादून, हद्वानी, पीलीभीत, बरेली सहित कई रूट शामिल हैं। हालांकि उन्होंने खुद स्वीकार किया कि कई लंबी दूरी की बसें बस अड्डे में प्रवेश तक नहीं करतीं और टांडे मोड़ से ही सीधे निकल जाती हैं, जिससे यात्री बस अड्डे पर पहुंचकर भी बस पकड़ नहीं पाते। अधिकतर बसें भी अपना टाइम पूरा कर चुकी हैं और जर्जर हालत में सड़कों पर चल रही हैं और बार-बार खराब होती हैं। कुल मिलाकर, काशीपुर का यह ऐतिहासिक रोडवेज स्टेशन अपनी उपेक्षा, जर्जर ढांचे, अव्यवस्थित संचालन और प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी का शिकार होकर बदहाली की मिसाल बन गया है।