आखिरी सीढ़ी पर खड़े वो लोग, जिन्हें हम अक्सर पीछे छोड़ देते हैं

काशीपुर। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि एक दिन हम भी बुज़ुर्ग होंगे। हमारे हाथ कमजोर हो जाएंगे, कदम धीमे पड़ जाएंगे, आंखों की रोशनी धुंधली हो जाएगी। समय किसी को नहीं छोड़ता। बड़े-बड़े सितारे, जिनकी एक झलक पाने के लिए लोग तरसते थे, वे भी उम्र के साथ कमजोर हो जाते हैं। जीवन में एक ऐसा समय अवश्य आता है जब हर इंसान को किसी और के सहारे की आवश्यकता होती है। इसलिए यदि आज हम किसी का सहारा बन सकते हैं, तो बन जाना चाहिए, क्योंकि समय का चक्र अवश्य घूमता है।
बुज़ुर्ग हमारे परिवार और समाज की वह अमूल्य धरोहर हैं जिन्होंने जीवन के संघर्ष, सफलता, दुख और खुशियों के हर रंग को जिया है। आज जब वे जीवन की अंतिम सीढ़ी पर खड़े हैं, तो उनका शरीर भले ही थक जाता है, पर उनका मन अब भी अपने परिवार के साथ हर खुशी में शामिल होने को आतुर रहता है। घर में विवाह हो, त्यौहार हो या कोई उत्सव, अक्सर देखा जाता है कि शरीर की कमजोरी के कारण कुछ बुजुर्ग एक कोने में शांत बैठे रहते हैं। वे सब कुछ देखते हैं, सुनते हैं, महसूस करते हैं, पर कई बार कुछ परिजनउनके पास बैठकर यह नहीं पूछते कि उन्हें कैसा लग रहा है या वे क्या सोच रहे हैं? अतः आवश्यक है कि हम हर अवसर, हर उत्सव और हर निर्णय में बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक स्थान दें। उनकी मुस्कान घर की वास्तविक रौनक है और उनका आशीर्वाद हर सफलता की सबसे बड़ी पूंजी।
