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शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी, बेटियों को समय दें माता-पिता: उर्वशी बाली

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शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी, बेटियों को समय दें माता-पिता: उर्वशी बाली

शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी, बेटियों को समय दें माता-पिता: उर्वशी बाली
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी, बेटियों को समय दें माता-पिता: उर्वशी बाली

काशीपुर। स्त्री की सबसे बड़ी शक्ति उसके संस्कार और उसकी मर्यादा हैं। वह चट्टानों से लड़कर अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सकती है और सम्मान की अधिकारी है, लेकिन मतभेद के नाम पर किसी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना नारी की गरिमा नहीं बढ़ाता।
समाजसेविका उर्वशी दत्त बाली ने हाल ही में सामने आए विवाद के संदर्भ में कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने समाज के सामने एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया हैकृक्या हम में से कुछ लोग सिर्फ अपनी बेटियों को केवल शिक्षा दे रहे हैं या उन्हें संस्कार, अनुशासन और सही दिशा देने के लिए पर्याप्त समय भी दे रहे हैं? उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री और किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। एक शिक्षित बेटी वही है जो अपने ज्ञान के साथ संयम, सम्मान, मर्यादा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को भी समझे। देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए यदि कोई सार्वजनिक रूप से बेहद अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करता है, तो यह निश्चित रूप से सोचने का विषय है कि हमारी शिक्षा के साथ संस्कारों पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। उर्वशी दत्त बाली ने कहा, “मैं गर्व महसूस करती हूं कि मैं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत की महिला हूं। मुझे इससे भी अधिक गर्व है कि मैं ऐसे युग में जन्मी हूं, जब भारत विश्व मंच पर अपनी नई पहचान बना रहा है।