आईटी अफसर की मौत और जिंदा होने के बीच उलझी रही पत्नी?
कानपुर। शहर के रावतपुर में आईटी अफसर विमलेश का शव डेढ़ साल तक घर में रखा गया। विमलेश का संयुक्त परिवार है यानी 12 सदस्यों का परिवार लाश के साथ डेढ़ साल तक रहा। घर के बाहर वाले कमरे में लाश को एक पलंग पर रखा गया था। इसके बावजूद पड़ोसियों को भनक तक नहीं लगी। जरा सी भी बदबू नहीं आई।
हालांकि,उनके दिमाग में यही बात थी कि बेटा कोमा में है। उसकी मौत नहीं हुई है। पुलिस पूछताछ में भी मां रामदुलारी ने कहा- इतने दिन तक बॉडी कौन रखता है? मैंने अपने बेटे की धड़कन सुनी थी। इसलिए उसकी देखभाल कर रही थी। इस पूरे केस में अब पुलिस को आशंका है कि परिवार तंत्र-मंत्र या किसी अंधविश्वास में फंस गया था। क्योंकि,अब तक की जांच में ये साफ हो चुका है कि परिवार ने विमलेश की मौत की बात छिपाकर किसी भी तरह का आर्थिक फायदा नहीं लिया है।
पुलिस की जांच में एक बात और सामने आई है। विमलेश अहमदाबाद में आयकर विभाग में पोस्टेड थे। 27 अप्रैल 2021 को अहमदाबाद ऑफिस में विमलेश की पत्नी मिताली का एक लेटर मिला था। इसमें पति के नाम के आगे स्वर्गीय लिखा हुआ था। पत्र में विभाग को सूचना दी गई कि विमलेश की मृत्यु कोरोना से हो गई है। पेंशन संबंधी औपचारिकताओं का जल्द से जल्द क्रियान्वयन किया जाए। विभाग ने पत्र के आधार पर प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसी बीच, फिर से 1 मई को मिताली का एक और पत्र अहमदाबाद ऑफिस को प्राप्त हुआ। इसमें लिखा था कि ऑक्सीमीटर से जांच में पति विमलेश की पल्स चलती पाई गई है और वह जीवित हैं। इसलिए पेंशन व फंड भुगतान की प्रक्रिया को रोक दिया जाए। इसके बाद विभाग ने विमलेश की पेंशन,फंड समेत अन्य भुगतान की प्रक्रिया रोक दी। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी ने जांच कमेटी गठित की। एडीसीपी पश्चिम लाखन सिंह यादव जांच को लीड करेंगे। वह यह पता करेंगे कि कहीं परिवार किसी के चक्कर में तो नहीं फंस गया था, जिसने बेटे को दोबारा जिंदा करने का दावा किया हो।

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