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नीरज चोपड़ा ने 88.13 मीटर दूर भाला फेंक 19 साल बाद भारत को दिलाया सिल्वर मेडल

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यूजीन। वल्र्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2022 में गोल्डन ब्वाय हरियाणा के छोरे नीरज नीरज चोपड़ा ने अमेरिका के यूजीन में इतिहास रच दिया है। नीरज ने 88.13 मीटर दूर भाला फेंककर सिल्वर मेडल हासिल किया। नीरज ने 19 साल का सूखा खत्म करते हुए 2003 के बाद भारत को इस चैम्पियनशिप में पहला मेडल दिलाया है। इसी प्रतियोगिता में 10वें नंबर पर रहते हुए रोहित यादव रेस से बाहर हो गए थे। इससे पहले वल्र्ड चैम्पियनशिप में इंडिया का सिर्फ एक ही मेडल था, जो लंबी कूद की एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 में कांस्य पदक से हासिल किया था। अब 19 साल बाद भारत के खाते में दूसरा मेडल आया, जो सिल्वर है।
नीरज चोपड़ा का पहला अटेम्प्ट फाउल रहा, जबकि दूसरे अटेम्प्ट में उनहोंने 82.39 मीटर का थ्रो किया। यह उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से काफी दूर था। दूसरी ओर, ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स ने पहले ही अटेम्प्ट में 90 मीटर को पार कर लिया। उन्होंने लगातार 3 अटेम्प्ट में 90.46, 90.21 और 90.46 मीटर का थ्रो करते हुए अपना मेडल लगभग पक्का कर लिया था।
नीरज ने तीसरे अटेम्प्ट में अपने प्रदर्शन में सुधार किया। उन्होंने 86.37 मीटर का थ्रो करते हुए चैथे नंबर पर पहुंच गए। भारतीय स्टार ने चैथे राउंड में 88.13 मीटर का थ्रो करते हुए दूसरा नंबर पा लिया। नीरज का यह ओलिंपिक से भी बेहतर प्रदर्शन था। उन्होंने ओलिंपिक में 87.58 मीटर का जैवलिन थ्रो करते हए गोल्ड मेडल जीता था। अब चेक रिपब्लिक के जेकुब वाद्लेज तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे। छठे राउंड में वह फाउल कर गए। वह 5वें राउंड में वह फाउल कर बैठे, लेकिन अच्छी बात यह रही कि जेकुब 81.31 मीटर ही फेंक सके। दूसरी ओर, ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स को गोल्ड मेडल मिला, जिन्होंने लगातार दूसरे बड़े इवेंट में नीरज से गोल्ड छीना है।
39 साल से चल रही वल्र्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का गोल्ड जीतने का सपना पूरा नहीं हो पाया। उसे सिल्वर से संतोष करना पड़ा। 19 साल बाद देश को इस चैंपियनशिप में कोई मेडल मिला है। नीरज से पहले अंजू बॉबी जार्ज ने लॉन्ग जंप में 2003 में ब्रॉन्ज जीता था। नीरज इस चैंपियनशिप में सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। साथ ही वे पहले भारतीय पुरुष एथलीट हैं, जिन्होंने इस चैंपियनशिप में कोई मेडल जीता है। नीरज ने पिछले साल ओलिंपिक में 120 सालों का सूखा खत्म किया था और भारत के लिए ट्रैक एंड फील्ड में गोल्ड मेडल लाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे। वल्र्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन पहली बार 1983 में किया गया था।

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