क्यों जरूरी है बच्चों के लिए मेला?

काशीपुर। डी बाली ग्रुप कीडायेक्टर उर्वशी दत्त बाली देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की पहचान से जुड़े मेलो के संबंध में बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रकाश डालते हुए कहती है कि हम खुशनसीब है जो हमारे शहर में मेला लगता है, जिसका नाम है चैती मेला। यह मेला सिर्फ एक मनोरंजन का साधन नहीं है,बल्कि मनोरंजन के साथ-साथ हमें हमारी पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू कराता हैऔर समय-समय के अंतराल पर हो रहे बदलावों के बाद जमीनी स्तर पर हो रहे असली काम की एक झलक भी दिखाता है।
श्रीमती उर्वशी दत्त बाली कहती है कि आज हम अपने बच्चों को बड़ी-बड़ी गाड़ियों,लक्ज़री लाइफ और फाइव स्टार होटलों की दुनिया दिखाते हैं,
लेकिन ज़रूरी है कि उन्हें जिंदगी की असली सच्चाई से भी रूबरू करवाएं। मेले में आकर बच्चे देखते है कि कम संसाधनों में भी कैसे बड़े सपने देखे जाते हैं,और मेहनत व हुनर के दम पर कैसे आगे बढ़ा जाता है? यहाँ बच्चे सिर्फ देखने नहीं,बल्कि सीखने भीआते हैं,एक हुनर, एक सोच, और एक नई दिशा। हम उन्हें सिखाने की कोशिश करते हैं,लेकिन सच तो यह है कि ये बच्चे हमें भी सिखा जाते हैं। हौसला, संतोष और हर हाल में मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना।
इसलिए मेरा सभी अभिभावकों से निवेदन है कि अपने बच्चों को काशीपुर में लगे इस मेले में ज़रूर लेकर आएं,ताकि वे सिर्फ सपने ही नहीं,,,बल्कि उन्हें सच करने का रास्ता भी सीख सकें। जरूरी नहीं कि बच्चों को हर वक्त समझाया जाए ,, बहुत सारी चीजें बच्चे देखकर भी समझते हैं और मेले क्यों, कब से, और किस कारण लगते हैं? इस बारे में भी अपनी प्राचीन सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत से भी परिचित होते हैं।
