काशीपुर। स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने यहाँ श्री हरि कृपा धाम आश्रम में उपस्थित श्र(ालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संकल्प की शक्ति अपरिमित है। संकल्प कालजयी है संकल्प की गति अबाध हैं जहां संकल्प है, वहां कुछ भी असंभव नहीं है पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की अभेद शक्ति भी मनुष्य के संकल्प को रोक नहीं सकी ओर व्यक्ति चन्द्रमा तक पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाएं, पौराणिक गाथाऐं, ऐतिहासिक घटनाएं सभी एक स्वर में संकल्प शक्ति रूपी इस महाशक्ति की क्षमता को प्रभावित करते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का प्रारंभ संकल्प मंत्र से ही होता है। अर्थात मनोवांछित इच्छा प्राप्त करने के लिए शुभ कार्य का आरंभ एक शुभ संकल्प से ही होता है। संकल्प शक्ति का यदि संधि विच्छेद किया जाए तो स्वयं ़कल्प होता है कल्प यानि कितने युग बितने के बाद कल्प आता है यह बता रहा है कि मनुष्य किसी कार्य को असंभव इसलिए कहता है क्योंकि उसे लगता है कि यह कार्य उसके जीवन में पूरा नहीं हो सकेगा। गहराई से विचार करे तो समय की सीमा उसकी सामर्थ्य और शक्ति को तोड़ देती है लेकिन परिभाषा के अनुसार देखें व चेतना में भरे तो यह हमारी सोई हुई शक्तियों को जगाकर किसी कार्य को भी असंभव न मानते हुये पूरा करने की प्रेरणा देगा। महाराजश्री के दर्शनार्थ काफी संख्या में भक्तजन पहुंचे।
