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मां का अंतिम संस्कार करने के लिए नहीं ‎मिल रहा बीजा, भारतीय उच्चायोग पर की थी पत्थरबाजी

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नई दिल्ली। ‎ब्रिटेन में रहने वाले एक शख्स को भारत में अपनी मां के अं‎तिम संस्कार में शा‎मिल होने के ‎लिए ‎गिड़‎गिड़ाना पड़ रहा है। दरअसल उसने भारतीय उच्चायोग पर पत्थरबाजी कर दी थी, ‎जिसके एवज में उसे वीजा नहीं ‎मिल रहा है। जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी (जेकेएनपीपी) के संस्थापक भीम सिंह के ब्रिटेन में रहने वाले बेटे अंकित लव ने ‘लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग पर पत्थरबाजी करने और अंडे फेंकने की गलती’ के लिए बिना शर्त माफी मांगी है। दरअसल, अंकित की मां का शव एक सप्ताह से अधिक समय से जम्मू के मुर्दाघर में रखा है, लेकिन उसे भारतीय वीजा नहीं मिल रहा, ताकि वह अपनी मां का अंतिम संस्कार करने के लिए भारत आ सके। अंकित को भारतीय अधिकारियों की तरफ से बताया गया है कि फरवरी 2021 में लंदन के भारतीय उच्चायोग में उस विरोध-प्रदर्शन के कारण उन्हें ‘ब्लैक लिस्ट’ कर दिया गया था, जिसमें उन्होंने भी हिस्सा लिया था। बता दें ‎कि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील रहीं जय माला का निधन बीते 26 अप्रैल को हो गया था और उनका शरीर तब से जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पड़ा हुआ है।
अंकित ने लंदन से फोन के माध्यम से मी‎डिय को बताया ‎कि मैं अपनी मां का चेहरा देखना चाहता हूं और उन्हें आखिरी बार गले लगाना चाहता हूं। उसने कहा, ‘मेरी मां यूपी के मेरठ की एक गौड़ ब्राह्मण थीं और उन्हें पूरा अधिकार है कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सभ्य और सम्मानजनक तरीके से उनका अंतिम संस्कार हो, जिसे वह अपनी अंतिम सांस तक मानती थीं। मैं, उनका इकलौता बेटा होने के नाते, उधमपुर में पवित्र देवक नदी के तट पर उनका कर्मकांड करना चाहता हूं, जो उनकी आखिरी इच्छा थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2 मई को लिखे एक पत्र में उन्होंने लिखा ‎कि मैं ब्रिटेन का निवासी, दिवंगत प्रोफेसर भीम सिंह और दिवंगत एडवोकेट जय माला का पुत्र अंकित लव, यूके में भारतीय उच्चायोग पर अंडे और पत्थर फेंकने की अपनी गलती के लिए ईमानदारी से माफी मांगता हूं, इसका मुझे गहराई और ईमानदारी से खेद है। माफी मांगते हुए, अंकित ने ‘केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर जो भारत में है’ का दौरा करने के लिए तत्काल वीजा जारी करने की अपील की। उसने पत्र में लिखा है कि वह स्थायी रूप से जम्मू नहीं जाना चाहता जब मैं मां का अंतिम संस्कार कर दूं, तो फिर मैं यूके के लिए वापसी की उड़ान में सवार हो जाऊंगा’।

3 thoughts on “मां का अंतिम संस्कार करने के लिए नहीं ‎मिल रहा बीजा, भारतीय उच्चायोग पर की थी पत्थरबाजी

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