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तिरंगा हाथ में लिए पहुंचे बॉर्डर छात्रों में दिखी वतन वापसी की खुशी

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नई दिल्ली । दिल्ली हवाईअड्डे पर रविवार को दोपहर तक एक के बाद एक कई उड़ान यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे भारतीयों को लेकर पहुंची। ये उड़ानें बुडापेस्ट, बुखारेस्ट, सुसेआवा, सूमी आदि से टर्मिनल 3 पर पहुंची थीं। यूक्रेन से आए छात्रों के चेहरे पर जहां अपने वतन लौटने की खुशी थी वहीं, उनके चेहरे पर यूक्रेन के वर्तमान हालत की परछाई भी साफ दिखी। छात्र यूक्रेन में युद्ध का जो मंजर देखकर आए हैं उससे सदमें में हैं। साथ ही छात्र अपनी आगे की पढ़ाई को लेकर भी बेहद चिंतित दिखे। 22 फरवरी से अब तक कुल करीब 15 हजार से अधिक छात्र भारत वापस लौट चुके हैं। देर शाम तक रविवार को भी करीब दो हजार छात्र पहुंचे। यूक्रेन से लौटे छात्रों के मुताबिक वहां लगातार जान का खतरा बढ़ रहा है। अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। सूमी में अब हालत बिगड़ रहें हैं। इससे पहली खारकीव और कीव में रूसी सैनिकों ने तबाही मचाई है। यूक्रेन से दिल्ली के मानसरोवर पार्क निवासी यशिका को पहले मुंबई पहुंचा दिया गया। फिर कई घंटे दिल्ली की कनेक्टिंग फ्लाइट देने का आश्वासन दिया गया। लेकिन, जब प्रशासन की तरफ से कोई बंदोबस्त नहीं हुआ तो वह खुद अपने खर्च से दिल्ली पहुंचीं। यशिका की मां स्नेहा के मुताबिक हंगरी बॉर्डर से बेटी विशेष उड़ान से दिल्ली आनी थी। लेकिन, उसे और उसके साथ के आठ से 10 बच्चों को मुंबई ले गए। फोन पर बात करने से प्रशासन ने पहले दिल्ली पहुंचाने की बात कही। लेकिन, जब दोपहर तीन बजे से रात के 9 बज गए तो उन्होंने बेटी की उड़ान बुक की और वह फिर दिल्ली आई है। यूक्रेन से दिल्ली के मानसरोवर पार्क निवासी यशिका को पहले मुंबई पहुंचा दिया गया। फिर कई घंटे दिल्ली की कनेक्टिंग फ्लाइट देने का आश्वासन दिया गया। लेकिन, जब प्रशासन की तरफ से कोई बंदोबस्त नहीं हुआ तो वह खुद अपने खर्च से दिल्ली पहुंचीं। यशिका की मां स्नेहा के मुताबिक हंगरी बॉर्डर से बेटी विशेष उड़ान से दिल्ली आनी थी। लेकिन, उसे और उसके साथ के आठ से 10 बच्चों को मुंबई ले गए। फोन पर बात करने से प्रशासन ने पहले दिल्ली पहुंचाने की बात कही। लेकिन, जब दोपहर तीन बजे से रात के 9 बज गए तो उन्होंने बेटी की उड़ान बुक की और वह फिर दिल्ली आई है।

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