चैती मेले के नखासा बाजार में पहुंच रहे घोड़ों के खरीदार

काशीपुर। चैती मेले में लगने वाला नखासा बाजार, जिसमें घोड़ों की खरीद-फरोख्त होती है। इस वर्ष भी घोड़ा प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से भी व्यापारी अपने बेहतरीन नस्ल के घोड़े लेकर यहां पहुंचे हैं। घोड़ा व्यापारियों ने बताया कि वे पिछले काफी वर्षों से इस मेले में आ रहे हैं। राजस्थान के बालोतरा क्षेत्र से आए व्यापारी पिछले 20 वर्षों से लगातार यहां घोड़े बेचने आ रहे हैं। मेले में घोड़ों की कीमत उनकी नस्ल, चाल और काबिलियत के आधार पर तय की जाती है। यहां घोड़े 50 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत तक बिक रहे हैं, जबकि कुछ खास नस्ल वाले घोड़े लाखों में भी पहुंच जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि अच्छे घोड़े की कोई निश्चित कीमत नहीं होती, वह अनमोल होता है। मेले में सिंधी और मारवाड़ी नस्ल के घोड़े प्रमुख रूप से देखने को मिल रहे हैं। घोड़ों की उम्र भी उनकी कीमत में अहम भूमिका निभाती है। आमतौर पर 2 साल की उम्र में घोड़े बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं, जबकि मेले में 3 से 5 साल तक के घोड़े अधिक संख्या में देखने को मिल रहे हैं। एक व्यापारी ने बताया कि उनके पास 12 घोड़े थे, जिनमें से अब तक 3 बिक चुके हैं, जबकि बाकी की बिक्री की उम्मीद बनी हुई है। कुल मिलाकर, काशीपुर का नखासा घोड़ा बाजार न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि घोड़ा प्रेमियों के लिए परंपरा, शौक और संस्कृति का जीवंत संगम भी बना हुआ है।
