काशीपुर। उत्तराखंड सूचना आयोग ने उत्तराखंड शासन के लोेक सूचना अधिकारी द्वारा मांगी गयी सूचना न उपलब्ध कराने को सूूचना की पहुुंच में बाधा मानते हुये, विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग के लोक सूचना अधिकारी को पैैनल्टी की चेतावनी जारी करने का आदेश किया है साथ ही उन्हेें सूचना अधिकार अधिनियम केे प्रावधानों से भलि भांति भिज्ञ होने व प्रशिक्षण प्राप्त करने को भी कहा हैै। यह आदेश सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन की अपील पर मुख्य सूचना आयुक्त अनिल चन्द्र पुनेेठा द्वारा किया गया हैै। सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने राज्यपाल सचिवालय के लोक सूचना अधिकारी से उत्तराखंड राज्यपाल द्वारा 07 मार्च 2017 को ई-विमोचित विधि संहिता 2017 केे सम्बन्ध में 7 बिन्दुुओें पर सूचनायें मांगी थी। राज्यपाल सचिवालय के लोक सूूचना अधिकारी द्वारा इस प्रार्थना पत्र कोे उत्तराखंड शासन के विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग के लोक सूचना अधिकारी को हस्तांतरित कर दिया। विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग के लोेक सूचना अधिकारी/अनुभाग अधिकारी द्वारा न तो बिन्दुवार सूचना प्रार्थना पत्र का उत्तर दिया गया औैर न ही वांछित सूचनायें उपलब्ध करायी गयी। प्रथम अपील करने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा भी सूचना उपलब्ध नहीं करवायी गयी। इस पर उत्तराखंड सूचना आयोेग कोे द्वितीय अपील की गयी। 28 फरवरी 2022 को द्वितीय अपील सं0 33028 की सुनवाई आडियो/वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुख्य सूचना आयुक्त अनिल चन्द्र पुुनेठा के समक्ष हुुई। दोेनोें पक्षों को सुुनने के बाद मुख्य सूचना आयुक्त ने नदीम उद्दीन के तर्कों को सुुनने के बाद मुख्य सूचना आयुक्त ने नदीम उद्दीन के तर्कों से सहमत होते हुये लोक सूचना अधिकारी/अनुुभाग अधिकारी सत्य प्रकाश को सूचना की पहुुंच तक बाधा उत्पन्न करने का दोषी माना और 10 मार्च 2022 तक अपीलार्थी को सूचना के अनुरोेध पत्र के सापेक्ष सुस्पष्ट व बिन्दुुवार सूचना प्रेषित करना सुनिश्चित करनेे तथा कार्यवाही सेे आयोग को अवगत कराने का आदेश दिया। मुख्य सूूचना आयुक्त अनिल चन्द्र पुुनेठा ने अपनेे निर्णय में स्पष्ट लिखा हैै कि लोेक सूचना अधिकारी द्वारा अपीलकर्ता की सूचना की पहुुंच तक बाधा उत्पन्न की गयी तथा वह सूूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों से भिज्ञ नहीं हैै। अतः लोक सूचना अधिकारी को चेतावनी निर्गत की जाती हैै कि वे सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 केे प्रावधानों से भली भांति भिज्ञ हों ले औैर आवश्यकतानुुसार प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लेें। भविष्य में उक्त कृृत्य की पुनरावृत्ति होेने पर वे शास्ति ;पैैनल्टीद्ध के पात्र हो सकते है। श्री पुनेठा नेे अपनेे निर्णय में अपीलार्थी को यह भी परामर्श दिया कि यदि धारित सूचनाओं की र्प्राप्ति के आलोेेक में कोई अनियमितता लगती हैै तो वे अधिनियम की धारा 18 ;1द्ध के तहत आयोेग में शिकायत के लिये स्वतंत्र है।श्री नदीम ने बताया कि सूचना अधिकार अधिनियम की 18;1द्ध में शिकायत करनेे पर भी धारा 20 केे अन्तर्गत पैैनल्टी व सेवा नियमों के अन्तर्गत लोक सूचना अधिकारी के विरू( कार्यवाही का आदेश दिया जा सकता है।

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